
कर्नाटक की वह सुबह जब शहर ने अपनी धड़कन खो दी
बेंगलुरु की वह सुबह हमेशा की तरह हल्की ठंडक लिए हुए थी, लेकिन वातावरण में एक ऐसी बेचैनी तैर रही थी, जिसे हर व्यक्ति महसूस कर रहा था। सड़कें थीं, ट्रैफिक था, दुकानें थीं—पर सब किसी अदृश्य बोझ से दबे हुए लग रहे थे। हर किसी के हाथ में फोन था, हर स्क्रीन पर एक ही खबर, और हर दिल में एक ही डर—Powerstar Puneeth Rajkumar अस्पताल में हैं। हजारों लोग अपनी-अपनी जगह से दौड़ते हुए अस्पताल पहुँचे, किसी की आँखों में दुआ थी, किसी की आँखों में डर, और किसी के होंठों पर बस यही शब्द—“Appu ठीक हो जाएगा…” यह कोई साधारण सुबह नहीं थी। यह उस नाम की चिंता थी, जो कर्नाटक की धड़कन बन चुका था।
एक महान पिता का घर, पर एक साधारण दिल वाला बच्चा (Puneeth Rajkumar biography in Hindi)

17 मार्च 1975 को जन्में Puneeth, Dr. Rajkumar जैसे दिग्गज के बेटे थे, लेकिन उनके घर में कभी अपनी प्रसिद्धि का घमंड नहीं था। बचपन से ही उन्हें सिखाया गया था कि “नाम बड़ा हो सकता है, लेकिन इंसान उससे बड़ा होना चाहिए।” Appu छोटा था, पर उसकी आँखों में एक अलग चमक थी—जैसे दुनिया को देखने का उसका अपना तरीका हो, और दूसरों के दुख को महसूस करने की उसकी अपनी गहराई हो। परिवार में अनुशासन, सादगी और इंसानियत की शिक्षा सिर्फ शब्दों में नहीं, उनके रोज़मर्रा के जीवन में थी। यही कारण था कि बड़े नाम का बेटा होने के बावजूद Puneeth जमीन से जुड़े रहे, और हर इंसान से प्यार और सम्मान से बात करते रहे।
कैमरे के सामने एक सितारा, पर्दे के पीछे एक संवेदनशील इंसान (Appu childhood story)
Puneeth ने बचपन में ही फिल्मों में कदम रखा और अपनी पहली ही फिल्मों में National Award जीत लिया। पर मज़ेदार बात यह है कि उन्हें कभी अपनी स्टारडम की परवाह नहीं हुई। वह सेट पर सबसे छोटे technician के साथ भी उसी प्यार से बात करते जैसे director से। कोई बच्चा रोता हुआ मिलता तो उसके पास बैठ जाते, crew का कोई सदस्य उदास दिखता तो उसका हाल पूछते। उनकी माँ अक्सर कहतीं—“Appu का दिल बहुत जल्दी पिघल जाता है।” इस मासूमियत में छुपी संवेदनशीलता ही आगे चलकर उनकी पहचान बनी। यह सिर्फ सितारा बनने वाला बच्चा नहीं था—यह एक ऐसा इंसान था जो दुनिया की तकलीफें देखकर चुप नहीं रह सकता था।
Appu’—एक फिल्म नहीं, एक ऐसा क्षण जिसने नए सितारे को जन्म दिया

2002 में ‘Appu’ रिलीज़ हुई और कर्नाटक में जैसे तूफान आ गया। लोग थिएटर के बाहर लाइन में खड़े, सीटों पर नाचते, और स्क्रीन पर उनके हर सीन पर सीटी बजाते। Puneeth की आवाज़, उनकी आंखों की चमक, उनकी ऊर्जा—सब कुछ लोगों के दिल में उतर गया। पर उनकी सादगी में कभी फर्क नहीं आया। उन्होंने कहा था—“अगर लोगों ने मुझे इतना प्यार दिया है, तो मुझे उससे दोगुना लौटाना पड़ेगा।” यही सोच उन्हें एक actor से एक विशाल इंसान की तरफ ले जा रही थी।
असली Appu—जो रात में बिना पहचान बताए बच्चों की फीस जमा करता था (Puneeth Rajkumar charity work)
कर्नाटक के लोग जानते हैं कि एक superstar कैसा होता है। पर Puneeth उससे बिल्कुल उलट थे। वह रात के समय अनाथालयों और सरकारी स्कूलों में चुपचाप जाते। बिना security, बिना camera, बिना publicity। बच्चों के साथ बैठकर बात करते—उनके परिवार, पढ़ाई, मुश्किलों के बारे में। फिर principal के कमरे में quietly जाकर स्कूल की फीस भर देते। कुछ स्कूल तो ऐसे थे जिन्हें उन्होंने पूरी तरह adopt कर लिया था, और कभी किसी को बताया भी नहीं। कई बार स्कूल के teachers तक को नहीं पता होता था कि “रात में आकर fees किसने भरी?”
वह मुस्कान से बस एक ही बात कहते—“एक शुभचिंतक।”
आज भी 2500 से ज्यादा बच्चे इन्हीं “शुभचिंतक” की वजह से पढ़ रहे हैं।
2500+ बच्चों की शिक्षा—Appu की सबसे बड़ी फिल्म (Puneeth Rajkumar helping children)
Puneeth सिर्फ charity नहीं करते थे—वह बच्चों के भविष्य में निवेश करते थे। उनकी फाउंडेशन ने अनगिनत स्कूलों को adopt किया, कई orphanages को बदल दिया, और हजारों बच्चों को स्कूल बैग, किताबें, यूनिफॉर्म, shoes, scholarship सब कुछ उपलब्ध कराया। उनके जाने के बाद भी यह सब रुक नहीं गया। क्योंकि उन्होंने मदद को एक “व्यवस्था” बना दिया था, न कि एक दिन की खैरात। आज जो बच्चा अपनी पहली किताब खोलता है, उसकी पढ़ाई के हर पन्ने पर Appu का आशीर्वाद छुपा है।
29 अक्टूबर 2021—वह दिन जब कर्नाटक रोने लगा (Puneeth Rajkumar death story in Hindi)
सुबह cardiac arrest की खबर आई। कुछ ही मिनटों में शहर अस्पताल की ओर दौड़ पड़ा। सैकड़ों नहीं—लाखों। महिलाएँ रो रही थीं, पुरुष जमीन पर बैठ चुके थे, युवा दुआ मांग रहे थे। लेकिन जब डॉक्टर बाहर आए और उनकी आँखों में उम्मीद नहीं, निराशा थी—पूरा कर्नाटक टूट गया।
“हम उन्हें बचा नहीं पाए…”
यह वाक्य इतिहास में दर्ज हो गया।
यह किसी superstar की मौत नहीं थी—
यह एक दिल, एक भाई, एक बेटे, एक फ़रिश्ते की विदाई थी।

लेकिन Puneeth आज भी जिंदा हैं—बस रूप बदलकर उनके जाने के बाद भी स्कूलों में रोशनी जलती रही, orphanages में मदद पहुँचती रही, बच्चों की फीस जमा होती रही।
क्यों?
क्योंकि Puneeth ने अपने जीवन को इस तरह बनाया था कि उनके जाने के बाद भी उनकी अच्छाई काम करती रहे।
आज भी हर बच्चा जो पहली बार अपनी uniform पहनकर स्कूल जाता है, उसकी मुस्कान में Appu की रूह बसती है। Powerstar की फिल्मों ने लोगों को मनोरंजन दिया,
लेकिन उनकी इंसानियत ने लोगों का भविष्य बदल दिया।
उनकी असली blockbuster फिल्म वह थी
जिसका नाम था—
“2500+ बच्चों की शिक्षा।” उन्होंने कहा था—
“अगर मेरे जाने के बाद भी कोई बच्चा मेरे कारण पढ़ पाए, तो वही मेरी जीत है।”
और आज उनकी जीत हर स्कूल के प्रार्थना गीत में सुनाई देती है।
Appu की कहानी खत्म नहीं होती, वह पीढ़ियों तक चलती है (Appu Inspirational story)
कुछ लोग दुनिया में आकर एक भूमिका निभाते हैं—
और चले जाते हैं।
लेकिन कुछ लोग ऐसी रोशनी छोड़ जाते हैं
जो कभी बुझती नहीं।
Puneeth Rajkumar उन्हीं में से एक हैं।
जब कोई बच्चा किताब खोलता है,
तो हवा में एक हल्की-सी फुसफुसाहट सुनाई देती है—
“Appu यहीं हूँ, बेटा… पढ़ते रहो।”
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